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महाराष्ट्र में गुइलेन बैरे सिंड्रोम (GBS) वायरस के मामलों में तेजी देखी जा रही है। हाल ही में पुणे से सटे पिंपरी चिंचवाड़ में 36 वर्षीय एक व्यक्ति की इस बीमारी के कारण मौत हो गई। मृतक पेशे से उबर कैब चालक था और 29 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई, जिसकी पुष्टि पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम ने की है। यह महाराष्ट्र में GBS से तीसरी दर्ज मौत है।

क्या है गुइलेन बैरे सिंड्रोम (GBS)?

गुइलेन बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। यह बीमारी मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता और गंभीर मामलों में पक्षाघात का कारण बन सकती है।

GBS के लक्षण: कैसे पहचानें इस बीमारी को?

GBS के शुरुआती लक्षण आमतौर पर पैरों और उंगलियों में कमजोरी और झुनझुनी के रूप में प्रकट होते हैं, जो धीरे-धीरे ऊपरी शरीर और भुजाओं तक फैल सकते हैं। इसके अन्य सामान्य लक्षण हैं:

असंतुलित चलना
 सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई
दोहरी दृष्टि (डबल विजन)
 हृदय गति में वृद्धि
 अंगुलियों, टखनों और कलाइयों में झनझनाहट या सुई चुभने जैसी अनुभूति
कम रक्तचाप और बेहोशी महसूस होना
मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर दर्द
गंभीर मामलों में मांसपेशियों की कमजोरी, जो पक्षाघात का कारण बन सकती है

अगर इन लक्षणों को समय पर नहीं पहचाना गया, तो यह बीमारी सांस लेने की समस्या, हृदय कार्यों में गड़बड़ी और आंतरिक अंगों पर प्रभाव डाल सकती है।

GBS के कारण : आखिर यह बीमारी क्यों होती है?

गुइलेन बैरे सिंड्रोम के सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन सांस या पाचन तंत्र के संक्रमण के बाद इस बीमारी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ संभावित कारण इस प्रकार हैं:

जीवाणु या विषाणु संक्रमण
हाल ही में टीकाकरण या कोई सर्जरी
तंत्रिका तंत्र की पुरानी समस्याएं (न्यूरोपैथी)
शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी

क्या GBS संक्रामक है?

नहीं, गुइलेन बैरे सिंड्रोम संक्रामक नहीं है। यह किसी अन्य व्यक्ति से नहीं फैलता और न ही यह वंशानुगत रोग है। हालांकि, यह बीमारी अधिकतर 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में देखी जाती है।

पुणे में GBS के मामलों में वृद्धि: क्या है कारण?

पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में GBS के मामलों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर रही है। पानी के नमूने लिए जा रहे हैं और लोगों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में जल प्रदूषण को इस बीमारी के संभावित कारणों में से एक माना जा रहा है।

GBS से जुड़ी जटिलताएं: कितना खतरनाक हो सकता है यह सिंड्रोम?

GBS तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे शरीर की कई महत्वपूर्ण क्रियाएं बाधित हो सकती हैं। इससे जुड़े कुछ गंभीर खतरे इस प्रकार हैं:

सांस लेने में परेशानी – यदि तंत्रिकाएं फेफड़ों को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं, तो मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।

 हृदय और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं – GBS से ग्रसित मरीजों में अनियमित हृदय गति और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

मांसपेशियों में असहनीय दर्द – नसों की क्षति के कारण मरीजों को तीव्र दर्द और ऐंठन का सामना करना पड़ता है।

आंत्र और मूत्राशय की समस्या – कुछ मामलों में मूत्र त्यागने या पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

बीमारी का दोबारा होना – कुछ मरीजों में GBS का प्रभाव ठीक होने के बाद भी वापस लौट सकता है।

गुइलेन बैरे सिंड्रोम का उपचार: क्या इस बीमारी का इलाज संभव है?

GBS एक गंभीर और संभावित रूप से जीवन-धमकाने वाली स्थिति है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही इलाज से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

1. इम्यूनोथेरेपी (Immune Therapy)

प्लाज्मा एक्सचेंज (Plasmapheresis): इसमें मरीज के खून से हानिकारक एंटीबॉडीज़ हटाई जाती हैं, जिससे तंत्रिकाओं पर प्रतिरक्षा प्रणाली का हमला कम हो जाता है।

इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी (IVIG): मरीज को इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सही ढंग से काम कर सके।

2. वेंटिलेटर सहायता (Ventilator Support)

GBS के गंभीर मामलों में श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकता है, जिससे मरीज को वेंटिलेटर पर रखना पड़ सकता है।

3. फिजिकल थेरेपी (Physical Therapy)

मांसपेशियों को फिर से सक्रिय करने के लिए फिजियोथेरेपी और व्यायाम किए जाते हैं।
मरीजों को चलने-फिरने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद की जाती है।


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