Baghpat Tragedy : उत्तर प्रदेश के बागपत में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया। भगवान आदिनाथ के निर्वाण लड्डू महोत्सव के दौरान मानस्तंभ परिसर में बना लकड़ी का मंच अचानक ढह गया। इस भयावह घटना में 50 से अधिक श्रद्धालुओं के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। अब तक की जानकारी के अनुसार, हादसे में सात लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं।
मृतकों की पहचान
हादसे में जान गंवाने वाले सात लोगों की पहचान हो चुकी है। मृतकों में शामिल हैं:
- त्रिशपाल जैन (74): हुकमचंद के बेटे
- अमित (40): नरेश के बेटे
- उषा (65): सुरेंद्र की पत्नी
- अरुण जैन मास्टर (48): केशवराम के बेटे
- शिल्पी जैन (25): सुनील जैन की बेटी
- विपिन (44): सुरेंद्र के बेटे
- कमलेश: सुरेंद्र की पत्नी
घटना का विवरण: कैसे हुआ हादसा?
यह दर्दनाक हादसा मंगलवार सुबह बड़ौत नगर क्षेत्र के गांधी रोड स्थित मानस्तंभ परिसर में हुआ। जैन समुदाय द्वारा मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें भगवान आदिनाथ के निर्वाण लड्डू चढ़ाने का आयोजन चल रहा था।
- श्रद्धालुओं के लिए परिसर में एक लकड़ी का मंच तैयार किया गया था।
- जैसे ही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी और लोग मंच पर चढ़े, मंच अचानक से ढह गया।
- मंच के गिरते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। कई लोग उसके नीचे दब गए।
राहत और बचाव कार्य
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग और पुलिस मौके पर पहुंच गए।
- घायलों को निकालने के लिए तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।
- मौके पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे बचाव कार्य में कठिनाई हुई।
- हादसे में 6-7 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
- डीएम अस्मिता लाल और एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और घायलों का हालचाल लिया।
घायलों की स्थिति
बागपत की डीएम अस्मिता लाल ने हादसे पर बयान देते हुए कहा:
- घटना में करीब 40 लोग घायल हुए हैं।
- 20 लोगों को प्राथमिक इलाज के बाद घर भेज दिया गया है।
- बाकी 20 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बागपत में हुए इस हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने और राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
- घायलों का इलाज बेहतर तरीके से कराने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
- मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।
सुरक्षा में हुई चूक?
इस हादसे ने आयोजकों और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंच की गुणवत्ता:
- जिस लकड़ी के मंच का इस्तेमाल किया गया, वह भारी वजन सहने लायक नहीं था।
- श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंच मजबूत होना चाहिए था।
सुरक्षा इंतजामों की कमी:
- इतने बड़े आयोजन के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे।
- भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती नहीं थी।
लापरवाही का नतीजा:
- यह घटना सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा है।
आयोजन स्थल पर भीड़ का दबाव
धार्मिक आयोजनों में अक्सर भारी भीड़ उमड़ती है, और इस बार भी ऐसा ही हुआ।
- श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के कारण मंच पर दबाव बढ़ गया, जिसके चलते यह ढह गया।
- आयोजकों को कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप तैयारियां करनी चाहिए थीं।
प्रशासन की अगली कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन द्वारा कई कदम उठाए गए हैं:
- घायलों का इलाज नजदीकी अस्पतालों में चल रहा है।
- राहत कार्य तेजी से जारी है।
- लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
- हादसे की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है।
ऐसे हादसे रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
सुरक्षा मानकों का पालन:
- बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन होना चाहिए।
- मंच और ढांचों की गुणवत्ता की जांच जरूरी है।
भीड़ नियंत्रण के उपाय:
- आयोजकों और प्रशासन को भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना चाहिए।
- लोगों को आयोजन स्थल पर सीमित संख्या में प्रवेश की अनुमति देनी चाहिए।
पूर्व योजना:
- ऐसे आयोजनों के लिए पहले से आपातकालीन योजना तैयार करनी चाहिए।
- बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ जैसे विशेषज्ञ बलों को तैनात करना जरूरी है।
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Brijendra
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