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Statement of Swami Avimukteshwarananda : प्रयागराज में आयोजित दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक मेला महाकुंभ महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ संपन्न हो गया है। लेकिन इस बीच, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने महाकुंभ को लेकर एक बड़ा दावा किया है, जिससे विवाद खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि असली महाकुंभ तो माघ पूर्णिमा पर समाप्त हो गया था और अब जो कुंभ चल रहा था, वह केवल एक 'सरकारी कुंभ' था।
शंकराचार्य का दावा: असली महाकुंभ पहले ही समाप्त हो चुका था
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा,
"महाकुंभ माघ पूर्णिमा के दिन ही समाप्त हो गया, क्योंकि पारंपरिक कुंभ माघ महीने में संपन्न होता है। माघ पूर्णिमा पर सभी कल्पवासी अपने स्थानों को लौट चुके थे। इसके बाद जो कुंभ जारी रहा, वह पारंपरिक कुंभ की तुलना में उतना महत्वपूर्ण नहीं है। यह सरकार द्वारा आयोजित कुंभ है, जिसका धार्मिक महत्व कम है।"
शंकराचार्य ने इससे पहले भी महाकुंभ की व्यवस्थाओं और योजनाओं पर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि यह कुंभ पूरी तरह से सरकारी आयोजन बन गया है और इसकी पारंपरिक मान्यताओं को नजरअंदाज किया गया है।
गोहत्या के मुद्दे पर सरकार को दी चेतावनी
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोहत्या के मुद्दे पर भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार से गोहत्या रोकने की मांग करते हुए कहा,
"हमने सरकार को 17 मार्च तक का समय दिया है। सभी राजनीतिक दलों और सरकारों को मिलकर यह तय करना चाहिए कि वे गोहत्या को रोकना चाहते हैं या इसे आजादी के बाद की तरह जारी रखना चाहते हैं। हम 17 मार्च तक इस पर सभी दलों के अंतिम फैसले का इंतजार करेंगे।"
महाकुंभ 2025: करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की डुबकी
प्रयागराज में इस वर्ष 13 जनवरी 2025 से शुरू हुए महाकुंभ में देश-विदेश से 66.30 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। महाशिवरात्रि के दिन, जो कुंभ का अंतिम स्नान माना जाता है, 1.53 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
महाकुंभ 2025: आंकड़ों में आस्था का महासंगम
महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है। इस वर्ष के मेले में कुल 66.30 करोड़ श्रद्धालु गंगा और संगम में स्नान कर चुके हैं।
मेला प्रशासन के अनुसार, बुधवार रात 8 बजे तक ही 1.53 करोड़ श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगा चुके थे।
अगर इन आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह संख्या अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। महाकुंभ की भव्यता और इसकी ऐतिहासिक एवं धार्मिक मान्यता को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है।