वास्तु टिप्स: वास्तु शास्त्र में घर के निर्माण में अनियमितता को वास्तु दोष कहा जाता है। वास्तु दोष का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। घर में या घर के बाहर कई तरह के वास्तु दोष होते हैं। वास्तु दोष कई प्रकार की बीमारियों और व्याधियों का कारण बनता है। ऐसे में अगर आपका घर त्रिकोणाकार, कोने वाला या वर्गाकार है और मुख्य दरवाजा दक्षिण की ओर है तो यह वास्तु दोष है। इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए आप घर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए आसानी से अपने घर के वास्तु दोष को दूर कर सकते हैं।
पांच तत्वों का वास्तु से गहरा संबंध
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ डाॅ. अनीष व्यास बताते हैं कि घर के उत्तर-पूर्व कोने को ईशान कोण कहा जाता है। जो जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। उत्तर-पश्चिम दिशा को वायव्य कोण कहा जाता है जो वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्निकृत कोण कहा जाता है जो अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा को नैऋत्य कोण कहा जाता है जो पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। घर के मध्य के स्थान को ब्रह्म स्थान कहा जाता है जिसे आकाश तत्व माना जाता है। इस प्रकार हमारा पूरा घर पांच तत्वों से बना है और हमारा शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से बना है। बेहतर और खुशहाल जीवन जीने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण है कि ये सभी दिशाएँ दोषरहित हों। जानिए इन दिशाओं के दोष दूर करने के सरल उपाय।
स्वस्तिक
वास्तु विज्ञान के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर सिन्दूर लगाकर स्वास्तिक चिन्ह बनाएं। ऐसा करने से हर तरफ से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। यह उपाय हर मंगलवार को करने से मंगल ग्रह से जुड़े अशुभ प्रभाव भी दूर हो जाते हैं।
रसोईघर में एक लाइट बल्ब लगाएं
वास्तु विज्ञान में घर की समृद्धि के लिए रसोईघर को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु के नियमों के अनुसार रसोईघर के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे उपयुक्त स्थान मानी जाती है। यदि रसोई गलत स्थान पर हो तो आग के कोने में एक बल्ब लगा दें और उस बल्ब को प्रतिदिन ध्यानपूर्वक जलाएं। इससे आपके घर का वास्तुदोष दूर हो जाएगा।
घोड़े की नाल
वास्तु के अनुसार घर में घोड़े की नाल लटकाना बहुत शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार पर काले घोड़े की नाल लगाने से सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। घोड़े की नाल का आकार अंग्रेजी अक्षर U जैसा होता है।
कलश स्थापना
वास्तु के अनुसार अगर घर में वास्तु दोष है तो कलश को घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखना सबसे अच्छा माना जाता है। ध्यान रखें कि कलश कहीं से भी खंडित न हो। हिंदू मान्यताओं के अनुसार कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। गणेश जी को खुशियाँ लाने वाला और विघ्नहर्ता माना जाता है। घर में कलश स्थापित करने से सभी काम बिना किसी बाधा के पूरे हो जाते हैं।
पूजा पाठ
जिस घर में प्रतिदिन पूजा और कीर्तन भजन होता है वहां मां लक्ष्मी स्वयं आकर निवास करती हैं। रोजाना पूजा करने से आपके घर का वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। अगर आपको हर दिन भजन-कीर्तन करने का समय नहीं मिलता है तो कम से कम हर दिन गायत्री मंत्र और शांति का पाठ करें।
नींद की दिशा
वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके सोने से आपको बुरे सपने और पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। नींद की कमी के कारण व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा रहता है और उसका शरीर सुस्त रहता है। जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। इसलिए आपको दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके सोना चाहिए। यह आपके मूड को बदल देगा और आपकी अनिद्रा की स्थिति में भी सुधार करेगा।
कूड़े की दिशा
घर के उत्तर-पूर्वी कोने में कभी भी कूड़ा-कचरा जमा न होने दें और यहां कोई भारी मशीनरी न रखें। जिसके कारण आपके घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। इसके अलावा आपको अपने वंश की उन्नति के लिए मुख्य द्वार के दोनों ओर अशोक का पेड़ लगाना चाहिए। इससे आपके घर से वास्तु दोष दूर हो जाएगा और घर में कभी भी नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करेगी।
शौचालय
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ. अनीष व्यास का कहना है कि घर में शौचालय बनाने की सबसे अच्छी दिशा दक्षिण-पश्चिम है। लेकिन अगर आपको घर की पूर्व दिशा में शौचालय बनवाना है और कोई विकल्प नहीं है तो आपको शौचालय की सीट इस तरह लगानी चाहिए कि उस पर बैठते समय आपका मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर हो। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा की जगह सकारात्मक ऊर्जा आ जाएगी और आपके सभी काम बनने लगेंगे।
Read More: मई 2025 व्रत-त्योहार कैलेंडर: बुद्ध पूर्णिमा से शनि जयंती तक, जानिए तिथियां, महत्व और पूजा मुहूर्त"
Brijendra
Share



